चुनाव के दौर में एक जुमला सुनने को मिला कि मुल्क में मुसलमान खतरे में हैं। मज़े की बात है कि किसी नेता ने यह नहीं कहा ( क्यूंकि नेता तो आम हर बात में यही कहते हैं, इसलिए वो कहते, तो ध्यान भी नहीं जाता