_परबतिया के माई और बाउ
प्रसंग__ का अंत इसके बाद
वाली पोस्ट में होगा ।
हालात कुछ ऐसे हो गए कि यह
पोस्ट ठेलनी पड़ी। मूढ़
इतना मूरख नहीं कि समय के
अनुसार न बदले। वैसे भी कथा
और व्यथा वाचन में तारतम्य
रहे तो लंठ आम ब्लॉगरों से
अलग कैसे कहाएगा? अतएव इस
कथा का आनन्द लें और
परबतिया के माई और बाउ
प्रसंग__ _के अंत की
प्रतीक्षा