'साध-साध रो गिलो रे, ते आप-आप रो मत! सुणजो रे शहर रा लोका, ए तेरापन्थी तन्त॥'

ते रापन्थ के आध-पुरुष स्वामी भिखणजी एक सत्य- सधायक एवम सिद्धान्तनिषठ आचार्य थे। स्वामीजी एक उत्सकृष्ठ सन्त थे। उनकी उत्सकृष्ठता का मूल कारण था आचार और विचार विषयक विशुद्धि की पुर्ण जागरुकता. आचार्य भि