लंठ महाचर्चा: ओझवा के ठेंगे से

परबतिया के माई और बाउ प्रसंग का अंत इसके बाद वाली पोस्ट में होगा । हालात कुछ ऐसे हो गए कि यह पोस्ट ठेलनी पड़ी। मूढ़ इतना मूरख नहीं कि समय के अनुसार न बदले। वैसे भी कथा और व्यथा वाचन में तारतम्य रहे तो