क्षितिज

क्षितिज अपूर्व तुम्हारा मिलन है तुम भरमाते आह्लादित करते और मन को एक सहारा देते कि मिलते हैं पृथ्वी और आकाश। तुम्हारा मिलन एक असत्य सत्य है, तुम्हें न दिन लिहाज न रात का डर है अपूर्व तुम्हारा मिलन है।