मैने एक सपना देखा था

मैने एक सपना देखा था. एक सपना जो ख़ुद-ब-ख़ुद अपने पैरों चल कर आया था। मैने उसे नहीं बुलाया था। उस सपने का न कोई मजहब था , न कोई वतन था, न कोई रूप- रंग था। यह महज़ यादों का एक सिलसिला था।