चाँद फ़िर निकला.....

अजीब इत्तेफाक़ है .... कभी कल्पना भी नहीं की थी कि मेरी नज्में किसी के लिए इतनी मायने रखेंगी कि वह उन्हें अपनी आवाज़ दे बैठेगा ...... जी हाँ ....... इन दिनों मुझे एक ऐसा तोहफा मिला कि मारे खुशी के आँख