' बचपन की वो मीठी यादें '

“बचपन की वो मीठी यादें“

बचपन की वो मीठी यादें ,
वो नन्हीं-सी अठखेलियां ,
याद आती है बहुत ,
वो भोली-सी नादानियां !

वो माँ का आँचल और
पापा की अंगुली थामें ,
चलना, गिरना और फिर संभलना !
वो नन्हीं हथेलियों से
अपने चेहरे को छुपाना ,
फिर उन्हीं हथेलियों से
झांक कर मुस्कुराना !
वो टिमटिमाते तारों को
पकड़ने की आस में
आसमान