आंसू बहाता बादल

देख के आज के हालत, आंसू बहाता बादल सीना छलनी कर धरा का,पानी के कतरे जमाता बादल खोद-खोद धरती को , सारा पानी बहा दिया था जो जीवन का आधार, उसे ही ढहा दिया अब खली रुई के फाहों से बरसने की आशा करते हो था ज