यूँ तो पिताजी का पूरा जीवन चरित यदि शब्दों पर उकेरने लगूँ तो निश्चित तौर पर न तो इससे अलग कुछ रचने का समय मिलेगन और ना ही आवश्यकता रहेगी...वैसे भी एक फौजी जीवन में शायद देश के हर सिपाही के पास ..कहने