मई दिवस

इस लघु-व्यंग्य को अवसरानुकूल प्रस्तुत करता तो इसकी धार को ज्यादा महसूसा जा सकता था, पर भूल गया...... अब प्रस्तुत कर रहा हूं........ उम्मीद ही नहीं यक़ीन है आप सब को अच्छा लगेगा... और हां इन दिनों अपनी