भला करो’ के दो शब्द ही अपने धर्म में पाता है जहाँ तक हो सके निभाता है आगे भी वही फैलाता है। प्यार के लिए ही समय प्रयाप्त नहीं मिलता नफ़रत के लिए वक्त कहाँ निकाल पाता है। किसी के दुख का सबब न बने कोई प