प्रमोद ताम्बट दसियों बार चाटे जाकर रद्दी हो चुके अखबार के पन्नों में मुंडी घुसाए किसी अपेक्षित आगंतुक की प्रतीक्षा में भिनके, कुढ़े , भुन्नाए बैठे पति-पत्नी आपस में बातें कर रहें हैं। सुन कोई किसी की