संडे यूं ही-सिर्फ इत्ता ही

वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं है
चालीस से ज्यादा साल निकाल दिये इस जिंदगी के। कितने क्षण ऐसे हैं, जब ऐसा लगा हो कि यह क्षण ऐसा है, जब लगा हो कि अब मामला खल्लास भी हो ले, तो प्राबलम नहीं।
बहुत कम-बहु