कल जब एक खास चैनल पर खास मुद्दे पर बहस हो रही थी, तो मुझे ये सोचने को मजबूर होना पड़ा कि आखिर हम एक खुले समाज में रह रहे हैं या फिर एक बंधे हुए, अनुशासित जीवन जीनेवाली संस्कृतिवाले समाज में। जो इस समा